यात्रा अनवरत


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के समर्पित सदस्य श्री पुनीत वर्मा के जीवन में स्वयंसेवा का बीजारोपण उनके जन्म से भी बहुत पहले हो चुका था। उनके ताऊ जी स्वर्गीय श्री राम कुमार वर्मा ने अपनी किशोरावस्था में क़दम रखते ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। 1948 में वह परम पूज्य सर संघचालक, श्री रज्जू भैया के साथ जेल गए। जल्द ही, उनके छोटे भाई श्री वीरेंद्र कुमार वर्मा, जो आगे चलकर कैप्टन वर्मा के नाम से लोकप्रिय हुए, ने भी अपने बड़े भाई के समान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ग्रहण की। कैप्टन वर्मा बाल स्वयंसेवक के रूप में संगठन में शामिल हुए और जल्द ही, स्वयं सेवकों के विशाल, समर्पित परिवार के सदस्य बन गए। स्वाभाविक ही था कि पूरा परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अभिन्न अंग बन गया, और समर्पित सदस्य के रूप में आरएसएस में शामिल होना परिवार की परंपरा में शामिल हो गया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा पूरे परिवार की जीवन-शैली में सम्मिलित हो गई।

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श्री पुनीत वर्मा के पिता, कैप्टन वर्मा अपनी युवावस्था के आरंभिक वर्षों में एनसीसी कैडेट रहे और सेना में शामिल हुए। आगे चलकर वह जाने-माने शिक्षाविद के रूप में भी पहचाने गए। वह इलाहाबाद जिले (अब प्रयागराज) के माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रहे और भारतीय जनता पार्टी में इलाहाबाद महानगर के उपाध्यक्ष पद को भी संभाला। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान श्रीराम की सेवा में उन्होंने दो बार जेल-यात्रा भी की।

श्री पुनीत वर्मा बचपन से ही अपने पिता कैप्टन वी.के. वर्मा और ताऊजी श्री राम कुमार वर्मा के पदचिन्हों पर चले। शैशवकाल से ही उन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पारंपरिक मूल्यों की सहज छाप पड़ी और वह संघ-परिवार की ओर स्वाभाविक रूप से आकर्षित हुए। वह बाल स्वयंसेवक के रूप में संगठन में शामिल हुए और भारत-माता एवं उसकी संतानों की सेवा-कार्य में स्वयं को समर्पित कर दिया।

1982 में अपनी किशोरावस्था में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य बने। उसी वर्ष उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। Read in English

about punit verma

स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं का गहरा प्रभाव उन पर बचपन से ही पड़ा था। स्वामीजी के साहित्य और शिक्षाओं ने उन्हें मानवता के प्रति समर्पित होने के लिए प्रेरित किया।

1984 में बजरंग दल का गठन होने पर पुनीत जी इस संगठन के सक्रिय सदस्य बने। 1985 में संगठन द्वारा आयोजित एक विशाल यात्रा की सुरक्षा का दायित्व श्री पुनीत को सौंपा गया। वह 1990 तक बजरंग दल के समर्पित सदस्य रहे, और बाद में उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर विश्व हिंदू परिषद का कार्यभार संभालने का दायित्व सौंपा गया।

1985 में राम जन्मभूमि यात्रा के दौरान उन्हें यात्रियों की सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया। 1989 में पुनीत जी ने इलाहाबाद रेलवे स्टेशन से होते हुए अयोध्या की यात्रा करने वाले कारसेवकों को भोजन पहुँचाने की व्यवस्था की।

1990 में उन्हें विश्व हिंदू परिषद, लाजपत प्रखंड, प्रयाग महानगर में मंत्री का पद सौंपा गया और 1992 में वह सह-मंत्री, विश्व हिंदू परिषद, प्रयाग महानगर के रूप में नियुक्त किए गए।

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1993 में उन्हें सह-संयोजक, बजरंग दल, प्रयाग विभाग का पद-भार सौंपा गया।

1993 से 1998 तक उन्होंने संगठन के लिए कई यात्राओं का आयोजन और नेतृत्व किया।

1995 से 2000 तक श्री पुनीत वर्मा ने बजरंग दल प्रयाग विभाग (संपूर्ण इलाहाबाद और कौशांबी) के संयोजक का कार्य भी वहन किया।

1996 में उन्होंने देश में पहली गौ-रक्षा चौकी का उद्घाटन किया।

2005 में उन्हें विश्व हिंदू परिषद, प्रयाग महानगर का कार्याध्यक्ष बनाया गया और 2007 में विश्व हिंदू परिषद, प्रयाग महानगर के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया।

उन्होंने विश्व हिंदू परिषद द्वारा शासित झूँसी के गोधाम में भी सक्रिय रूप से काम किया।

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विश्व हिंदू परिषद, प्रयाग के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान बीपीएल कॉलोनियों में विभिन्न सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें शामिल थीं :
● 17 बालवाड़ी केंद्रों की स्थापना और उनका सफल प्रबंधन
● 5 सिलाई केंद्रों का शुभारंभ
● इलाहाबाद में 22 विभिन्न स्थानों पर शहर के प्रमुख चिकित्सकों और सर्जनों की देखरेख में स्वास्थ्य शिविरों का सफलतापूर्वक आयोजन
उन्होंने 2011 से 2017 तक विश्व हिंदू परिषद, काशी प्रांत के उपाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। श्री पुनीत वर्मा द्वारा की गई प्रमुख सामाजिक गतिविधियों में निम्नलिखित सम्मिलित हैं :
● 1993 में उन्होंने माननीय श्री केशव प्रसाद मौर्य जी के साथ मंझनपुर (कौशाम्बी) उपचुनाव के आयोजन में कार्य किया।
● 1996, 1998 और 1999 में माननीय डॉ. मुरली मनोहर जोशी के तीन लगातार संसदीय चुनावों के प्रभारी के रूप में उन्हें नियुक्त किया गया।
● 2014 में उन्हें इलाहाबाद निर्वाचन क्षेत्र में संसदीय चुनावों के प्रबंधन का प्रभार दिया गया।
● 2019 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान के तहत विभिन्न मंडलों में कई शिविर आयोजित किए।
युवावस्था से ही उनका जीवन हमेशा सामाजिक सेवाओं में समर्पित रहा है। उन्होंने भारत विकास परिषद के सदस्य के रूप में भी काम किया। अपने पिता स्वर्गीय कैप्टन वी के वर्मा के साथ उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम, प्रयाग में भी सेवा-कार्य आरंभ किया, जहाँ वह पिछले 40 वर्षों से अब तक लगातार अपनी सेवाएँ देते आ रहे हैं। वेद विद्यालय (विश्व हिंदू परिषद) के सदस्य (उपाध्यक्ष) के रूप में उन्होंने लंबी अवधि तक अपनी सेवाएँ दीं। साथ ही, श्री पुनीत वर्मा इलाहाबाद बैडमिंटन एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी रहे हैं और स्वामी विवेकानंद जन कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। यह समिति पिछले 40 वर्षों से निशुल्क औषधालय और पुस्तकालय की सुविधा प्रदान कर रही है। यही नहीं, वह नव संवत्सर मानस समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत हैं। अतीत में, उन्होंने इसी संगठन के महामंत्री के रूप में भी कार्य किया। 2020-21 में COVID-19 महामारी के दौरान भी श्री पुनीत वर्मा ने सार्वजनिक सेवा में योगदान दिया और लोगों को खाद्यान्न, आदि प्रदान करने के साथ ही उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निस्स्वार्थ सेवा की। अपने इस लक्ष्य को कुशलतापूर्वक संपादित करने के लिए, उन्होंने अपने शैक्षणिक संस्थान, एम.एल. कॉन्वेंट स्कूल में खाद्यान्न के गोदाम की स्थापना भी की।


श्री पुनीत वर्मा की यह सेवा यात्रा अनवरत जारी है, जारी रहेगी।

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